Showing posts with label Hope. Show all posts
Showing posts with label Hope. Show all posts

प्यास बरकरार रख - 2

पहला भाग यहाँ / First Part Here

 

हर हर्फ़1 में जो पीड़2 हो
वक़्त गूढ़ गंभीर हो
फीके क्षणों की धार में
थोड़ी हँसी को घोल के  
परिहास3 बरकरार रख
तू प्यास बरकरार रख39.jpg

गुलशन जब बेनूर हो
और वसंत कुछ दूर हो
क्रूर खिज़ाओं4 में डटकर
अपनी आरजूओं के
अमलतास5 बरकरार रख
तू प्यास बरकरार रख

नौ भावों से है बना  
ये ज़िन्दगी का चित्र है
इक भी कम नहीं पड़े
खुद में नवरसों का तू
एहसास बरकरार रख
तू प्यास बरकरार रख

कल  ही कल की नींव था 38.jpg
कल ही कल का सार है 
कभी भी ये भूल मत 
भविष्य को तू साध पर
इतिहास बरकरार रख
तू प्यास बरकरार रख

पहले वार में कहाँ
कटे कभी पहाड़ हैं
हर नदी मगर मिली
अन्तः अपने नदीश6 से
बस, प्रयास बरकरार रख
तू प्यास बरकरार रख

Photo Courtesy: Flickr and Flickr
------------------------
हर्फ़ - Word
पीड़ - Pain
परिहास - Humour
खिज़ा - Autumn, Decay
अमलतास - A flowering tree (also known as golden shower tree)
नदीश - Sea

प्यास बरकरार रख - 1

 

धूप हो कड़ी तो क्या 36.jpg
तीरगी1 घनी तो क्या
लक्ष्य का अमृत भी तू 
पायेगा पर इतना तो कर
प्यास बरकरार रख
तू प्यास बरकरार2 रख

मंजिलें कभी कभी
अदृश्य3 जो लगें तुझे
तू तनिक आराम कर
एक गहरी सांस भर
आस बरकरार रख
तू प्यास बरकरार रख

राह हो, थकान हो
बाधाएँ तमाम हों 37.jpg
नींद भी गर ले पथिक
जगे हुए ख्वाब संग
रास बरकरार रख
तू प्यास बरकरार रख

हाँ, छूटते हैं आसरे
हाँ, छूटते हैं काफिले
पर सांस छूटने तलक
दिल में हौसलों का तू
वास बरकरार रख
तू प्यास बरकरार रख

बस धड़कने से ही नहीं
दिल हो जाता दिल है
आदमी बने इन्सान
इसीलिए दिल में तू
आभास4 बरकरार रख
तू प्यास बरकरार रख

 

Photo Courtesy: Flickr and Flickr
-------------------

तीरगी: Darkness
बरकरार रख: Don't let it die
अदृश्य: Invisible
आभास: Feelings

कोई है

जब अँधियारा गहराता है
और चाँद कहीं सो जाता है 29.jpg
जब शाम का गहरा साया
हर नयी सहर1 पर छाता है
तब रौशनी का भान लिए
दूधिया फैली चांदनी सा,
कोई तो राह दिखाता है

जब सन्नाटा और ख़ामोशी
ही कान में बजती जाती है
सरगम और संगीत हो चुप
आवाज़ भी थक सी जाती है
तब ग़म को इक साज़ बनाकर
तान छेड़कर, नाद बजाकर
कोई तो सुर में गाता है

जब नज़र दूर तलक जाकर
रूआंसी सी लौट के आती है
कहती है कहीं कुछ और नहीं
चहुँ ओर फकत2 इक उदासी है
तब साँसों की आवाज़ में घुल
और सन्नाटे के शोर में मिल
कोई तो आस बंधाता है

जब वक़्त की चलती रेतघड़ी3 से
हर पल छन-छन के गिरता है 33.jpg
और काल का बहता दरिया भी
कुछ थम-थम कर के चलता है
तब दुःख से भारी लम्हे चुनकर
और यादों की झालर में बुनकर
कोई तो समय कटाता है

जब खुद की ही परछाई
पर की छाया हो जाती है
मुरझायी और झुकी झुकी 
अपनी काया हो जाती है
तब उम्मीद का स्पर्श4 लिए
हिम्मत की डोर बांधकर
कोई तो मुझे चलाता है

Photo Courtesy: Flickr and Flickr 
---------------------------------
सहर – Morning
फकत – Only
रेतघड़ी – Hourglass
स्पर्श – Touch