Showing posts with label जिद्द. Show all posts
Showing posts with label जिद्द. Show all posts

जिद्द…

3700865553_d7c79a1ff1_m

नहीं तोड़ेगा कमर वो दुपहरी की धूप में 
घर भर का चूल्हा सुलगाने के लिए अब   
हम उस इंसान को ही जलाने पे तुले हैं


खोखले वादों से झूठे सपने दिखा और  
हालात के तम में भीड़ को गुमराह कर
हम सैलाब का संयम आजमाने पे तुले हैं

देवताओं के बुतों को मंदिरों में बिठाने
और मोम के पुतले महलों में सजाने  
हम रोज़ कुछ बस्तियां गिराने पे तुले हैं

विश्व भर को अहिंसक स्वयं को बता कर
दो शब्द करुणा के समझने के लिए अब 
हम खुद ही को असमर्थ बताने पे तुले हैं

सदा ही जयते जहाँभर की विषमता पर 
आज अपने ही सब अंतर द्वंदों के समक्ष
हम आखिर-कार घुटने टिकाने पे तुले हैं

तब राख से उठने की चाहत लेकर चले थे 
ये किस मुकाँ पे आ गए की आज देखो
हम खुद ही को ख़ाक में मिलाने पे तुले हैं

Photo Courtesy: Flickr